जल में रहिये परंतु जल से प्रभावित
ना होइये । आत्मा प्रकृति के मध्य रहते हुये प्रकृति से प्रभावित ना होवें । यह
अपेक्षा है । इसे कितना सत्य कौन कर सकता है । इस उपलब्धि से ही समस्त अंतर होंगे
। प्रकृति से प्रभावित आत्मा प्रकृति की दासता करेगी । प्रकृति से ना प्रभावित
आत्मा स्वतंत्रता का आनंद भोग करेगी । चुनाव प्रत्येक के अपने विवेक के अधीन होता
है ।
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