प्रकृति का प्रत्येक प्रेरण अन्य
शक्तियों से सम्भव होता है । शक्तियाँ – भौगोलिक, जीव विज्ञान, वंशपरम्परा, व सामाजिक । प्रकृति के कार्य को करने के लिये उसे किसी बाह्य श्रोत की
आवश्यकता होती है । यह परवशता है । इसके विपरीत आत्मा में सृजनात्मक क्षमता होती
है । यह स्वयं सक्षम होता है । यह स्वतंत्रता है । कर्म का सिद्धांत प्रकृति के
क्षेत्र में प्रभावी होता है । कर्म-सिद्धांत के अनुसार कर्ता प्रकृति होती है ।
स्वतंत्र आत्मा मात्र प्रकृति के आदेशित कार्यों का प्रेरक बनकर आदर्श जीवन
प्रशस्थ करता है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें