इस शरीर की रचना दो भिन्न प्रकार
के अवयवों के सन्योग से सम्भव हुई है । एक प्रकृति निर्मित भाग है जो कि मृत्यु को
प्राप्त होता है । दूसरा अविनाशी ब्रम्ह का अंश है जो कि अज़र और अमर होता है । यह
भाग मृत्यु से प्रभावित नहीं होता है । प्रथम भाग के मृत्यु के समय यह दूसरा भाग
ब्रम्ह के विशिष्ट विज्ञान द्वारा दूसरी शरीर में अंतरित किया जाता है । पुनर्जन्म
का सिद्धांत व्यक्त करता है कि किसी भी शरीर में भोग करती आत्मा द्वारा क्रियांवित
किये गये कार्यों का अंकन आत्मा के साथ रहता है और उन्ही कर्मों के फल भोगने हेतु
ही उसे नयी शरीर आवंटित होती है ।
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