मंगलवार, 23 सितंबर 2014

कर्म द्वारा मुक्ति

कर्म सिद्धांत के अनुसार समस्त कर्मों की कर्ता प्रकृति होती है । इसलिये प्रेरक आत्मा यदि कंचिद उन्ही कर्मों को प्रेरित करती है जो कि प्रकृति द्वारा किये जा रहे हैं तो ऐसी दशा में आत्मा सही कर रही होती है । आत्मा की इस स्थिति को पाने के लिये यह अनिवार्य वाँक्षना होती है कि वह प्रकृतीय मोंहसे मुक्त होवे । अन्यथा की दशा में आत्मा अपनी आसक्ति के अनुसार इच्छाजनित कर्मों को प्रेरित करने को उद्यत होगी जो कि उसके लिये दोषपूर्ण कहा जावेगा । आत्मा की मुक्ति दशा पाने के लिये योगावस्था में कार्यों को करने का अभ्यास सहायक होगा ।  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें