ब्रम्ह किसी को अच्छा या बुरा
चुनने के लिये बाध्य नहीं करता है । यह प्रत्येक मनुष्य का अपना विवेक निर्धारित
करता है । जो मनुष्य दृढता से अच्छा पथ चुनता है उसी की आत्मा प्रकृति के मोंह से
मुक्त हो पाती है । रचयिता ब्रम्ह ने प्रत्येक मनुष्य को बनाया इसी निमित्त से है
कि वह ब्रम्ह के कार्यों को ब्रम्ह की अपेक्षानुसार यथासमय करे । यदि मनुष्य इस
अपेक्षा के विपरीत प्रकृतीय मोंह के वशीभूत इच्छाजनित कार्यों को करता है तो यह
स्थिति उसकी आत्मा के विक्षेप का द्योतक होती है ।
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