रविवार, 21 सितंबर 2014

आत्मा का विक्षेप

ब्रम्ह किसी को अच्छा या बुरा चुनने के लिये बाध्य नहीं करता है । यह प्रत्येक मनुष्य का अपना विवेक निर्धारित करता है । जो मनुष्य दृढता से अच्छा पथ चुनता है उसी की आत्मा प्रकृति के मोंह से मुक्त हो पाती है । रचयिता ब्रम्ह ने प्रत्येक मनुष्य को बनाया इसी निमित्त से है कि वह ब्रम्ह के कार्यों को ब्रम्ह की अपेक्षानुसार यथासमय करे । यदि मनुष्य इस अपेक्षा के विपरीत प्रकृतीय मोंह के वशीभूत इच्छाजनित कार्यों को करता है तो यह स्थिति उसकी आत्मा के विक्षेप का द्योतक होती है । 

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