मंगलवार, 2 सितंबर 2014

उत्कर्ष की ओर

प्रकृति हमें वही पथ प्रदान करती है जिससे यात्रा कर हम उस परम् सत्य को हासिल कर सकें । इस काल से बाधित शरीर से हम उस चिर सत्य को प्राप्त हो सकें । इसी प्रकृति निर्मित शरीर के माध्यम से उस दिव्य शांति की स्थिति को प्राप्त कर सकें। अपने इस स्वार्थ पर आधारित विवेक द्वारा हम उस परम् सत्य के प्रयोजन के एक निष्ठावान कर्मी बन सकें । इन सब उत्कर्ष स्थितियों को पाने के लिये हमें मात्र अपने अंदर विद्यमान ब्रम्ह की छवि को पहचानने की अनुभूति करने की आवश्यकता है । इस परिचय के बाद जीवन ब्रम्ह के दिव्य स्वरूप का अंग बन जावेगा ।  

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