आत्मा परम् सत्य ब्रम्ह का अंश है
। ब्रम्ह ने अपनी माया की शक्ति द्वारा अपने को इस रूप में प्रगट किया है । यह
ब्रम्ह की बौद्धिक शक्ति का परिणाम है कि अविभाज्य ब्रम्ह ने आत्मा के रूप में
अपने अंश को विकीर्त किया है । आत्मा के परिपेक्ष्य में ब्रम्ह इसके पिता के समान
हैं । आत्मा की कार्यगुणवत्ता इसके में व्याप्त ब्रम्ह के प्रति भाव में निर्भर
करती है । आत्मा की कार्य विशिष्टता (1) इसमें व्याप्त ब्रम्ह के प्रति भाव (2)
प्रकृतीय संसर्ग के कारण जनित प्रकृति के गुणों में मोंह के स्तर के आधार पर निर्भर
करती है |
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