शनिवार, 20 सितंबर 2014

कर्म प्रेरक

कर्म सिद्धांत के अनुरूप कर्म प्रेरण आत्मा उसी दशा में कर सकती है जबकि आत्मा प्रकृतीय मोंह से मुक्त दशा में होगी । कर्म सिद्धांत के अनुसार कर्मों की कर्ता प्रकृति को बताया गया है । आत्मा का प्रकृति के प्रति मोंह उसे परवशता की दशा प्रदान करता है । आत्मा की प्रकृतीय मोंह से मुक्ति उसकी स्वतंत्रता है जो कि उसे अपने परम् पिता तुल्य ब्रम्ह की ओर बढने का आधार प्रदान करने वाली दशा है । 

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