जिस मनुष्य की आत्मा ने पूर्णरूप
से प्रकृति पर विजय कर लिया है वह कहा जावेगा जितात्मन: । सामान्य मनुष्य प्रकृति
द्वारा विजित होता है । सामान्य मनुष्य की आत्मा प्रकृति के अधीन होता है ।
प्रकृति के मोंह में आसक्त । परंतु जिसने विषेस प्रयत्नों के द्वारा आत्मा की
प्रधानता स्थापित करली है उसे फिर संसार में प्रचलित द्वैत सुख-दु:ख, हर्ष-विषाद आदि में अंतर नहीं रह जाता है । वह सदैव आत्मचेतना में परमात्मा
के सुखानुभूति में आनंदित जीवन जीता है ।
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