मनुष्य शरीर में इंद्रियाँ, मस्तिष्क प्रकृतीय रचना हैं । मस्तिष्क इंद्रियों का नियंत्रक है । इन समस्त
का कार्य आत्मा के प्रेरण पर निर्भर करता है । मस्तिष्क का नियंत्रण योग है ।
आत्मा का प्रकृतीय मोंह आत्मा की व्याधि है । इसप्रकार नियंत्रित मस्तिष्क और
व्याधिरहित आत्मा द्वारा प्रेरण होने की दशा सृजित करेगी कर्मयोग । योग की अवस्था
में किये जाने वाले कर्म । मस्तिष्क की योग की अवस्था । वह अवस्था जिसमें कार्य के
परिणाम से मस्तिष्क प्रभावित ना होवे । योगावस्था के मस्तिष्क का प्रेरण मोंह की
व्याधि से रहित आत्मा द्वारा । कर्मयोग । योगेश्वर श्रीकृष्ण कर्मयोगी थे ।
कर्मयोगी ही युग प्रवर्तक होता है ।
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