सोमवार, 13 अक्टूबर 2014

मोंह का नाश

आत्मा का प्रकृतीय मोंह आत्मा की व्याधि है । यह व्याधी आत्मा की कार्य गुणवत्ता का नाश करने वाली होती है । योगावस्था में किये जाने वाले कर्म इस व्याधि का निवारण पथ होता है । मस्तिष्क के पूर्ण नियंत्रण द्वारा मस्तिष्क की योग की अवस्था पैदा होती है । कर्म संविधान के प्रति निष्ठा । कर्मों की कर्ता प्रकृति है । यह कर्म संविधान है । इसे स्वीकारना आत्मा का अभीष्ट होता है । इच्छाओं से आच्छादित आत्मा कर्म संविधान के उलँघन को प्रवृत्त होती है । मस्तिष्क की योग की दशा इस व्याधि का निवारण पथ्य है ।  

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