मंगलवार, 7 अक्टूबर 2014

ज्ञान विज्ञान तृप्त आत्मा

इस परिवर्तनशील संसार के पृष्ठभूमि में अपरिवर्तनीय सत्य को जानना ज्ञान है । परिवर्तनशील और अपरिवर्तनीय के भेद को जानना विज्ञान है । जिस मनुष्य की आत्मा उपरोक्त दोनो का स्मरण प्रतिपल संजोये अपना कार्य दायित्व कार्यों का प्रेरण निर्वाह करती है उसके कार्य पूर्णरूप से कार्य संविधान की मंशा के अनुरूप होते हैं । यही मुक्तात्मा का सत्य परिचय है । 

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