जिस मनुष्य ने अपनी आत्मा पर विजय
कर लिया है उसे जितात्मन: कहा जावेगा । जिसकी आत्मा का प्रकृतीय मोंह से पूर्ण
मुक्ति हो गई हो वह जितात्मन: है । जिसकी आत्मा का कर्म प्रेरण यथा अपेक्षित है वह
जितात्मन: है । जिसकी आत्मा कर्म सिद्धांत का पूर्णरूपेण सम्मानपूर्वक पालन करती
है वह जितात्मन: है । कर्मसिद्धांत के अनुसार समस्त कर्मों की कर्ता प्रकृति है ।
आत्मा मात्र उन कर्मों को प्रेरित करती हो जिसकी कर्ता प्रकृति है वह जितात्मन: है
।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें