जिस व्यक्ति की आत्मा प्रकृति पर
विजय प्राप्त करली है । दूसरे शब्दों में जिस व्यक्ति की स्वतंत्र प्रवृत्ति ने
परवशता पर आधारित एवं परवशता जनित करने वाली वृत्तियों पर विजय प्राप्त करली है ।
ऐसे व्यक्ति के लिये परवशता भी मित्रवत् आचरण करने वाली बन जाती है । परंतु जिस
व्यक्ति की आत्मा परवशता की प्रतीक प्रकृति के मोंह में आसक्त है । उस व्यक्ति के
लिये परवशता शत्रुवत् व्यवहार करने वाली होती है ।
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